
रामनगर सोमवार को रामलीला के 24 में दिन हुए मंचन में युद्ध प्रसंग देखकर लीला प्रेमियों की भीड़ उम्रड़ पड़ी चारों ओर जय श्री राम के नारे गुजते रहे और पुलिस प्रशासन सुरक्षा व्यवस्था में तैनात रहा कहानी के अनुसार रावण का अहंकार उसे सत्य से भटका देता है, विभीषण और कुंभकरण ने भी समझाया लेकिन रावण न माना रावण ने कुंभकरण को जगा कर युद्ध में भेजा रणभूमि में उसका विशाल का रूप देख वानर भालू सहम गए इनको श्री राम ने पराक्रमण दिखाकर उसका वध किया इसके बाद रावण का पुत्र में युद्ध भूमि में आया उसने आकाश मार्ग से एस्ट्रोश की वर्षा की और नागपाश से श्रीराम को बांध दिया, गरुड़ के प्रकट होते ही प्रभु मुक्त हुए, विभीषण की सलाह पर लक्ष्मण ने युद्ध में मेघनाथ का वध किया हनुमान उसका शव लाकर द्वार पर रख देते हैं, मेघनाथ और कुंभकरण के वध से रावण विलाप करता है, मंदोदरी भी शोक में डूब जाती है, अंत मैं प्रवचन में बताया गया कि यह सब ब्रह्मा की लीला है आरती और जयकारों के साथ मंचन का समापन हुआ
